रालोद पर बसपा सुप्रीमों मायावती ने चली ये चाल

लखनऊ। अखिलेश-मायावती के सीट बंटवारे के फार्मूले से रालोद के लिये मुश्किल खडी हो गई है। अखिलेश-मायावती ने घोषणा की है कि 38-38 सीटों पर एसपी-बीएसपी चुनाव लड़ेगी। 80 में से बच गयी 4 सीटें। ये सीटें अपना दल(एस), राजभर की पार्टी, सोनिया और राहुल के लिए बिना गठबंधन के ही छोड़ी गयी हैं।
जो ऐलान नहीं हुआ, उसमें राष्ट्रीय लोकदल को गठबंधन में साथ रखने का एलान शामिल है। मगर, इसका मतलब ये नहीं है कि अब रालोद से गठबंधन नहीं होगा। जानकारों को मनाना है कि ये अखिलेश नहीं मायावती की रणनीति है। मायावती रालोद को इस प्रैस वार्ता के बाद दबाव में ले लिया है और उसे 2 सीटों पर फैसले लेने के लिये मजबूर किया है। वार्ता में एक तरह से रालोद के लिये कोई सीट नहीं छोड़ने का ऐलान किया गया है। मगर, एक सम्भावना ज़िन्दा है कि अगर आरएलडी से बातचीत जारी रही तो दोनों दल एसपी-बीएसपी अपने-अपने कोटे से उनके लिए सीट छोड़ सकते हैं। मगर, जिस तरह से एकतरफा एलान किया गया है उसे देखकर नहीं लगता कि दो सीट से ज्यादा देने को ये दल तैयार होंगे। मायावती इस बात से संतुष्ट है कि रालोद लगातार भाजपा विरोधी राजनीति कर रही है, चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी अपने हर बयान में मोदी और योगी सरकार पर जमकर निशाना साधते रहे है, इससे उनके भाजपा के साथ जाने की संभावनां बेहद कम है, साथ ही अकेले या कांग्रेस के साथ मिलकर रालोद सीटें निकालने की स्थिति में दिखाई नहीं देती, इसलिये रालोद को लेकर दोनों दल कितने गम्भीर है ये पत्रकार वार्ता में साफ दिखाई दिया।

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