कैराना उपचुनाव में रालोद के टिकट पर अपना उम्मीदवार उतारेगी सपा, जानिए गठबंधन को लेकर पर्दे के पीछे की पूरी कहानी….

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शामली/लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने भाजपा के खिलाफ बसपा के साथ बने गठबंधन में रालोद को शामिल कर लिया है और कैराना लोकसभा सीट पर अपनी पार्टी की तबस्सुम रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया है। नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा के नईमुल हसन इस गठबंधन के साझा उम्मीदवार होंगे।


सपा व रालोद के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद यह फार्मूला निकाला गया और इस पर सहमति बन गई। सूत्रों के मुताबिक कैराना लोकसभा क्षेत्र में पांच लाख मुस्लिम वोटरों के मद्देनजर सपा यहां मुस्लिम प्रत्याशी लड़ाना चाहती थी। जबकि रालोद अपने महासचिव जयंत चौधरी के लिए यह सीट सपा से चाहती थी। चूंकि तबस्सुम हसन यहां बसपा से सांसद रह चुकी हैं और उनके बेटे नाहिद हसन कैराना से सपा के विधायक हैं, ऐसे में उन्हें ही मजबूत प्रत्याशी माना गया। पर, सपा की प्रत्याशी रहते तबस्स़ुम को जाटों का समर्थन मिलना मुश्किल था। इसलिए रालोद के टिकट पर उन्हें च़ुनाव लड़ाने का रास्ता निकाला गया।

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अब रालोद की प्रत्याशी बनने से जाट वोट मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। इस नाम पर रालोद को राजी करने के लिए उनके नेताओं से दोबारा बातचीत हुई और बात बनती गई । इसी तरह का रास्ता सपा ने गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में निकाला जब उसने निषाद पार्टी के अध्यक्ष के बेटे को सपा का सिंबल देकर गोरखपुर से चुनाव लड़ाया और बसपा के सहयोग से जीत हासिल की।


कैराना सीट यहां से सांसद हुकुम सिंह के निधन से रिक्त हुई है। इस सीट पर मुस्लिम, दलित व जाट वोट तो सपा बसपा, रालोद गठजोड़ के हक में दिखते हैं लेकिन भाजपा ने अपनी सिटिंग सीट को बरकरार रखने के लिए सारी ताकत झोंक दी है। कैराना लोकसभा सीट भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन से जबकि नूरपुर विधानसभा सीट लोकेंद्र सिंह के निधन के कारण रिक्त हुई है । यह दोनो सीटें भाजपा की सिटिंग सीटें हैं। इन पर उपचुनाव 28 मई को होना है।

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