राजस्थान में आरक्षण को लेकर आई बडी खबर, गहलोत सरकार करेगी ये काम

जयपुर। संसद में हुए 124वें संविधान संशोधन के बाद राजस्थान में आर्थिक पिछड़ों को 14 प्रतिशत आरक्षण मिलने की राह खुल गई है। राजस्थान न सिर्फ तीन वर्ष पहले इसके लिए विधेयक पारित कर चुका है, बल्कि आरक्षण देने के लिए आर्थिक पिछड़ों के परिमाणात्मक आंकड़े भी यहां तैयार हैं। ऐसे में राजस्थान अकेला ऐसा राज्य है, जहां इस आरक्षण को लागू करने के लिए जरूरी सभी शर्ते पूरी हैं।
मौजूदा सरकार ने भी इसे लागू करने के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।राजस्थान आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण देने के लिए दो बार बिल पारित कर चुका है और दोनों बार यह इसीलिए अटका कि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं थी और सुप्रीम कोर्ट ने 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण पर रोक लगा रखी थी।
राजस्थान में आर्थिक पिछड़ों को आरक्षण देने की चर्चा सबसे पहले 2003 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई थी जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आर्थिक रूप से पिछड़ों को 14 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग उठाई थी। इसके बाद 2003 के चुनाव में भाजपा सत्ता में आई और गुर्जर आरक्षण विवाद को शांत करने के लिए इस सरकार ने आरक्षण का पूरा एक नया बिल पारित किया। इस बिल में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 49 प्रतिशत आरक्षण को बरकरार रखते हुए गुर्जर व अन्य बेहद पिछड़ी जातियों के लिए पांच प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई थी।

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