मुजफ्फरनगर के किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण-डीएम

  मुजफ्फरनगर (muzaffarnagar)।  प्रभारी जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि परियोजनाओ का संचालन वैल्यू चैन मैकेनिज्म के अन्तर्गत उद्यमिता मोड में किया जाता है। उन्होने बताया कि जनपद के किसानो/ स्वरोजगारन्मुखी युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर उनके माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है। उन्होने बताया कि मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कृषि अपशिष्टों तथा अन्य जैव अपशिष्टों के जलाये जाने के कारण पर्यावरण सम्बन्धित समस्याओं के स्थायी निराकरण हेतु उत्तर प्रदेश राज्य जैव उर्जा विकास बोर्ड द्वारा राज्य जैव उर्जा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के आलोक में किया जाता है। प्रभारी जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद के किसानो/ स्वरोजगारन्मुखी युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर उन्ही के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है।
प्रभारी जिलाधिकारी ने बताया कि इस सम्बन्ध में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेतु जनपद के 5 युवाओं/कृषकों को जिलाधिकारी द्वारा प्रशिक्षण हेतु नामित किया है। उन्हेने बताया कि अरविन्द मलिक ग्राम बधाईकंला को वर्मी कम्पोस्ट एवं मसाला खेती तथा राकेश कुमार ग्राम बेहडा सादात को वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन एवं जैविक खेती तथा ब्रजमोहन ग्राम चुडियाला को वर्मी कम्पोस्ट एवं जैविक खेती, हरिओम त्यागी ग्राम सोहजनी तगान वर्मी कम्पोस्ट एवं औद्यानिक खेती तथा विनोद ग्राम सोहजनी तागान को वर्मी कम्पोस्ट एवं औद्यानिक खेती का अनुभव है। प्रभारी जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश जैव उर्जा विकास बोर्ड द्वारा राज्य जैव उर्जा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के आलोक में विभिन्न परियोजनाओं का संचालन वैल्यू चैन मैकेनिज्म के अन्तर्गत उद्यमिता मोड में किये जा रहा है। उन्होने बताया कि समस्त प्रकार के जलने योग्य बायोमास अपशिष्टों जैसे समस्त प्रकार के कृषि अपशिष्ट-धान का पुवाल, मक्के की डन्ठल, मक्के की खुण्डी तथा गन्ने की पत्ती इत्यादि का उपयोग कर बायोकाल(पैलेट्स तथा ब्रिकेट्स) उत्पादन की परियोजना। उन्हेने बताय कि इन परियोजनाओं के विस्तार कार्यक्रम में ऑंफ ग्रिड मोड में प्रोड्यूसर गैस आधारित विद्युत उत्पादन की इकाई की स्थापना कर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सैक्टर की इकाई का अनवरत विद्युत आपूर्ति को उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान करना। उन्होने बताया कि समस्त प्रकार के सडने योग्य जैव अपशिष्टों, जैसे गोबर, जानवरो का बचा हुआ चारा, सब्जी मण्डी, फल मण्डी का कचरा, स्लाटर वेस्ट यदि कोई हो तो, इत्यादि का उपयोग कर बायोगैस/बायो सी0एन0जी0 के उत्पादन की कार्ययोजना। प्रभारी जिलाधिकारी ने बताया कि कृषि हेतु पूर्णतः अनुपयुक्त भूमि जैसे ऊसर, परती, बंजर, नदी के किनारे की खाली भूमि जॅंहा जंगली जानवरो के प्रकोप के कारण किसान खेती नही कर पाते, जल प्लावित भूमि, इत्यादि का उपयोग कर बायोमास उत्पादन कार्यक्रम का संचालन करते हुए किसानो के स्थायी आय संवर्द्वन के प्रयासों का गति प्रदान की जायेगी तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अन्तर्गत औषद्यीय, सगंध पौध की समूहगत आधार पर क्रियान्वित कर किसानो के स्थायी आय संवर्द्वन में योगदान करना।

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