माया-अखिलेश के ऐलान से पहले अजित सिंह ने सीटों पर खेला बडा दांव

लखनऊ। आगामी लोकसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के गठबंधन की संभावनाओं के बीच राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि गठबंधन के साथियों से बातचीत के बाद ही सीटों पर फैसला होगा।
प्रदेश में एसपी-बीएसपी गठबंधन पर अजित सिंह ने कहा, ’अभी सीटों पर बातचीत नहीं हुई है। गठबंधन के साथियों से बात करेंगे, जिसके बाद ही कोई फैसला होगा। एसपी-बीएसपी प्रमुख की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुझे जानकारी नहीं है।’ सूत्रों के मुताबिक मायावती, आरएलडी को तीन सीटों से ज्यादा देने के लिए राजी नहीं हैं, जबकि आरएलडी कम से कम छह सीट चाहती है। गठबंधन के तहत मथुरा, बागपत और मुजफ्फरनगर की सीटें आरएलडी को दी जा सकती हैं, लेकिन पार्टी और सीटें चाहती है। इस बीच आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष मसूद अहमद ने कहा है कि उनकी पार्टी प्रदेश की छह सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट अमेठी और सोनिया गांधी की सीट रायबरेली पर महागठबंधन अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगा। निषाद पार्टी को भी महागठबंधन में शामिल किया जा सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने 73 सीटें जीती थीं और इस बार उसके नेता 73 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं। बीएसपी-एसपीऔर आरएलडी ने साथ मिलकर उपचुनाव लड़ा था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर सीट और उप मुख्यमंत्री की फूलपुर सीट से एसपी प्रत्याशियों को जीत मिली थी। जबकि कैराना सीट पर आरएलडी प्रत्याशी ने बीजेपी से यह सीट छीनी थी। बीएसपी सुप्रीमो मायावती गुरुवार शाम दिल्ली से लखनऊ पहुंची। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वह 15 जनवरी को अपने जन्म दिन के दिन महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है लेकिन अब जन्म दिन के तीन दिन पहले ही इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है।
बता दें कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव शनिवार को लखनऊ में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों आगामी लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं। साथ ही इस दौरान सीटों के बंटवारे को लेकर ऐलान भी संभव है। प्रेस कॉन्फ्रेंस दोपहर 12 बजे लखनऊ के होटेल ताज में होगी, जिसके लिए मीडिया को आमंत्रित किया गया है। होगी। यूपी की राजनीति और खासकर एसपी-बीएसपी के लिए शनिवार का दिन बेहद अहम साबित होगा। ऐसा पहली बार होगा जब यूपी की राजनीति के दो दिग्गज मायावती और अखिलेश यादव साथ-साथ मीडिया से रूबरू होंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस का आमंत्रण एसपी के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी और बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की ओर से भेजा गया है। इससे पहले राम मंदिर आंदोलन के दौर में 1993 में एसपी और बीएसपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और बीजेपी को शिकस्त देते हुए राज्य में गठबंधन सरकार बनाई थी। बता दें कि गुरुवार को बीएसपी चीफ मायावती तीन महीने बाद दिल्ली से लखनऊ पहुंची थीं।
यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं। माना जा रहा है कि दोनों पार्टियां 37-37 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं। वहीं कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की स्थिति में उन्हें सिर्फ उनकी परंपरागत दो सीटें- अमेठी और रायबरेली दी जाएंगी। आरएलडी के भी इस गठबंधन में शामिल होने की संभावना है, जिसे 3 से 4 सीट दी जा सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर अखिलेश और माया गठबंधन करते हैं तो 25 साल पहले का करिश्मा फिर से दोहराया जा सकता है, जब एसपी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने कांशीराम के साथ बीजेपी के रोकने के लिए हाथ मिलाकर यूपी में सरकार बनाई थी। मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव और कांशीराम की उत्तराधिकारी मायावती का यह कदम एक बार फिर से बीजेपी को ही रोकने के लिए है, जिसने साल 2014 के लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष को हाशिये पर धकेल दिया था।

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