वेस्ट यूपी में भाजपा को ले न डूबे भीम आर्मी


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मेरठ। सहारनपुर के बाद मेरठ में हुई घटना के बाद भीम आर्मी एक बार फिर सक्रिय है। दलित आंदोलन के सहारे भीम आर्मी वेस्ट यूपी में अपनी जड़ें और गहरी करना चाहती है। उल्देपुर में हुई दलित युवक की हत्या के मामले में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं द्वारा पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने की घोषणा कर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। भारतीय जनता पार्टी की कैराना और फूलपुर में भीम आर्मी के कारण उपचुनाव हारने की स्वीकारोक्ति और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का जेल में बंद इसके संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण से मिलने की इच्छा जाहिर करना भी वेस्ट में भीम आर्मी की बढ़ती ताकत को दिखाता है।
भीम आर्मी इन दिनों वेस्ट यूपी में दलितों पर होनेवाले हमलों पर तीखे तेवर अपनाए हुए है। उल्देपुर में जाटव युवक की हत्या, बुलंदशहर के डबकोरा गांव में दलितों पर हमले और युवतियों से छेड़छाड़ के आरोप जैसे मामलों में भीम आर्मी अपने को दलित समाज के साथ मजबूती से खड़े होते दिखाना चाहती है। भीम आर्मी की वेस्ट यूपी में बढ़ती सक्रियता से बीजेपी के माथे पर भी बल पड़ने लगे हैं। बीजेपी भी स्वीकार कर चुकी हैं कि कैराना व फूलपुर में उनकी हार भीम आर्मी के कारण हुई थी। वेस्ट यूपी में पैर जमाने की कोशिश में जुटी आम आदमी पार्टी भी भीम आर्मी की ताकत देख, उससे मधुर रिश्ते बनाना चाहती है। खुद अरविंद केजरीवाल ने सहारनपुर जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण से मिलने की इजाजत जिला प्रशासन से मागी थी। अनुमति न मिलने पर उन्होंने ट्वीट कर अपनी नाराजगी भी प्रकट की है। वही दलितों में भाजपा सरकार के प्रति असंतोष उत्पन्न हो रहा है, जिसे भीम आर्मी भुनाना चाहती है।

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