क्या आप जानते हैं एक महिला को डिलीवरी के समय कितना दर्द होता है? जानकर कांप जाएगी आपकी रूह

डिलीवरी के समय का दर्द : मां शब्द के आगे हर शब्द छोटा लगता है. कहते हैं कि मां के चरणों में दुनिया होती है और मां बच्चे के रिश्ते से गहरा कोई रिश्ता नहीं होता. एक मां अपने बच्चे के मन की बात बिन कहे समझ जाती हैं. वह अपने बच्चों के सारे दुख तकलीफों को अपना बना लेती है. एक लड़की के लिए मां बनने का सुख सबसे बड़ा सुख होता है. एक लड़की असल मायने में पूर्ण तभी मानी जाती है जब वह मां बन जाती है. एक मां अपने बच्चे से निस्वार्थ प्रेम करती है. एक बच्चा भी अपनी मां की गोद में ही खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित समझता है. मां और बच्चे का रिश्ता होता ही निस्वार्थ है.

बच्चे अपनी मां की कोख में आते ही उसे पहचान लेते हैं. 9 महीने बाद जब वह इस दुनिया में आता है तब मां के सीने से लगकर उसे सबसे अधिक खुशी मिलती है. कहते हैं कि मां बनने का सुख बड़े भाग्य से मिलता है. जब एक मां अपने बच्चे को जन्म देती है तो असहनीय पीड़ा से गुजरती है. उस समय उसकी पीड़ा का अंदाजा कोई लगा भी नहीं सकता. जरा सी चोट लगने पर जहां एक पुरुष पूरा घर सिर पर उठा लेता है. वहीं, एक महिला में सहनशक्ति इतनी ज्यादा होती है कि बच्चे को जन्म देते समय होने वाली पीड़ा को वह हंस कर सह लेती है. यह बात तो बिलकुल सच है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना सहने की क्षमता ज्यादा होती है.

पुरुषों से ज्यादा ताकतवर होती हैं महिलाएं :
डिलीवरी के समय का दर्द

यह एक ऐसा समय होता है जब महिला किसी भी पुरुष से ज्यादा दर्द बर्दाश्त करती है. भारत में महिलाओं की स्थिति अब भी कुछ क्षेत्रों में बहुत कमज़ोर है. अब भी कुछ लोग ऐसे हैं जो महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कमज़ोर व नीचा समझते हैं. इस मानसिकता वाले लोगों की संख्या अब भी हमारे देश में बहुत ज्यादा है. लेकिन ऐसे लोग यह नहीं जानते कि महिलाओं से ज्यादा ताकतवर कोई नहीं है. महिलाओं में जितनी सहनशक्ति होती है उतनी किसी में नहीं है.

सबसे ज्यादा दर्द महिलाओं को उस समय होता है जब वह गर्भवती होती हैं. यह दर्द बढ़ते महीने के साथ बढ़ता ही जाता है. जैसे-जैसे महिलाओं की डिलीवरी पास आती है वैसे-वैसे महिलाओं का दर्द भी बढ़ता जाता है. गर्भवती अवस्था में महिलाओं को दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसी समस्या सताने लगती है. इसके बावजूद वह अपनी कोख में पल रहे बच्चे का पूरा ध्यान रखती है और उसकी यही कोशिश रहती है कि बच्चे को किसी प्रकार की तकलीफ न हो.

डिलीवरी के समय का दर्द : 200 हड्डियां एक साथ टूटने के बराबर होता है दर्द

लेकिन सबसे ज्यादा दर्द का एहसास उसे बच्चे की डिलीवरी के दिन होता है. 9 महीने बाद जब वह अपने बच्चे को जन्म देती है उस समय होने वाले दर्द के बारे में आप और हम सोच भी नहीं सकते. जब किसी मनुष्य की कोई हड्डी टूट जाती है तब वह चीखने-चिल्लाने और रोने लगता है. लेकिन क्या आप जानते हैं एक महिला को डिलीवरी के समय कितना दर्द होता है?

 

आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि एक महिला को डिलीवरी के समय 200 हड्डियां एक साथ टूटने के बराबर दर्द होता है. इसलिए कहा जाता है कि मां का स्थान भगवान से भी ऊपर होता है और उसकी हमेशा इज्जत करनी चाहिए. क्योंकि एक मां आपको दुनिया में लाने के लिए जितना कष्ट सहती है उतना कष्ट आप ताउम्र भी नहीं सह सकते. एक मां का कर्ज कोई नहीं उतार सकता. भारत की हर एक मां को न्यूज़ट्रेंड का सलाम!